क्या यीशु परमेश्वर है?

{-} ट्रिनिटी का सिद्धांत
{-} ट्रिनिटी के बारे में अधिक
{-}परमेश्वर पवित्र आत्मा
(-)परमेश्वर पुत्र
(-)क्या यीशु परमेश्वर है?
(-)यीशु परमेश्वर है
१. आज, पहले से कहीं अधिक, यह सवाल पुछा जाता है कि परमेश्वर कौन है - विशेष रूप से यीशु।
२. परमेश्वर के बारे में हम जो कुछ भी सीख सकते हैं वह हमारे जीवन को समृद्ध करेगा। २ पतरस १: २; २ करूं १३:१४
३. परमेश्वर ने हमें बाइबल में और उसके माध्यम से स्वयं को प्रकट करने के लिए चुना है। बाइबल में परमेश्वर के बारे में सबसे उल्लेखनीय बातों में से एक यह है कि वह एक परमेश्वर में तीन व्यक्ति हैं। परमेश्वर एक त्रिगुणात्मक है, एक में तीन हैं। (ट्रिनिटी ''त्रिगुण'' का सिद्धांत)I
१. जब हम बाइबल पढ़ते हैं, तो हम स्पष्ट रूप से देखते हैं कि केवल एक परमेश्वर है। जिसमे, हम स्पष्ट रूप से तीन दिव्य व्यक्तियों को देखते हैं जो परमेश्वर हैं - पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा।
२. तीनों व्यक्ति परमेश्वर के गुणों, क्षमताओं के अधिकारी हैं और विशेषताओं को प्रदर्शित करते हैं - वे सभी हैं और वह सब कर सकते है जो केवल परमेश्वर ही कर सकता हैI
३. परमेश्वर ऐसा नहीं है जो तीन अलग-अलग लोगों के काम करता है, और न ही वह पीटर, जेम्स और जॉन जैसे तीन अलग-अलग व्यक्ति हैं जो सभी एक साथ काम करते हैं। केवल एक ही परमेश्वर है, लेकिन उसमे तीन दिव्य व्यक्ति हैंI
४. यहाँ त्रिमूर्ति की एक परिभाषा दी गई है: "एक परमेश्वर के भीतर तीन व्यक्ति विद्यामान है, वह तीन अनादि और सहवर्ती व्यक्ति अर्थात् पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा " (जेम्स आर। व्हाइट)
४. बाइबल यह साबित नहीं करती है कि परमेश्वर त्रिगुणात्मक है, वह इसे मानती है। आप ट्रिनिटी को समझाने और परिभाषित करने वाले एक पद की ओर मुड़ नहीं सकते। आपको पूरी बाइबल पढ़नी है। और, जो आप उत्पत्ति से प्रकाशितवाक्य तक देखते हैं, वह एक परमेश्वर है जो परमेश्वर पिता, परमेश्वर पुत्र और परमेश्वर पवित्र आत्मा है।
५. १ क्लू १३: १२- इसकी सीमाएँ हैं, कि अब हमे परमेश्वर की कितनी समझ हैI
१. परमेश्वर अनंत है (किसी भी प्रकार की सीमा के बिना, न तो समय और न ही स्थान)। वह शाश्वत है (जिसका कोई आरंभ या अंत नहीं है, और वह वर्तमान में रहता है)। और, हम जो कि रचित हैं इसलिए अंतरिक्ष और समय के अनुसार सीमित हैं।
२. लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि हमें अध्ययन नहीं करना चाहिए। इसका मतलब है कि हमें वह नहीं समझना है जो हम समझने में सक्षम नहीं है। और बस यह स्वीकार करना हैं कि परमेश्वर स्वयं के बारे में क्या कहता है।
३. परमेश्वर अतुलनीय है - उसे मानव बूढी द्वारा पूरी तरह से समझा नहीं जा सकता है। फिर भी, परमेश्वर जानने योग्य है, और उसने हमे स्वयं को हम पर प्रकट करने के लिए चुना है। हम उसे जान सकते हैं। यर्मि ९: २३,२४; यहुना १७: ३
६. जब हम ट्रिनिटी का अध्ययन करते हैं, तो हमें यीशु और पवित्र आत्मा कि दिव्यता पर ध्यान लगाना चाहिए।
१. कोई भी विवाद नहीं करता कि पिता ही परमेश्वर है। लेकिन, ऐसे लोग हैं जो कहते हैं कि यीशु और पवित्र आत्मा परमेश्वर नहीं हैं, और इसलिए, परमेश्वर एक त्रिमूर्ति नहीं है।
२. इस पाठ में, हम यीशु कि दिव्यता पर विचार करना चाहते हैं। क्या वह परमेश्वर है?
७. मसीहियत अद्वितीय है। यह यीशु की शिक्षाओं पर ही आधारित नहीं है, यह यीशु के व्यक्तित्व पर आधारित है - वह कौन है, वह क्या है और उसने क्या किया है। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि आपके पास यीशु की स्पष्ट, बाइबिल समझ हो
१. जब वह पृथ्वी पर था, तो यीशु ने कहा कि अंत समय में बहुत सारे झूठे मसीह जगत में उठ खड़े होंगे। मति २४: ४,५; २३,२४
२.आज, कई धर्म यीशु का प्रचार करते हैं, लेकिन बाइबल के का यीशु नहीं। (मॉर्मन, यहोवा के साक्षी, आदि और बहुत सारे)
८. यहाँ यीशु के बारे में कुछ विचार रखे गए हैं - जिनमें से सभी बाइबल का खंडन करते हैं: वह एक निर्मित प्राणी है। वह एक फरिश्ता है। वह पिता से हीन है। वह एक ऐसा मानव है जिसने सच्चे (परमेश्वर की खोज की); वह एक बहुत बड़ा गुरु था, समय यात्री, या अंतरिक्ष से आया था।
९. यह ज़रूरी है कि हम बाइबल से यीशु के बारे में हमारी जानकारी हासिल करें, जो यीशु के बारे में पूरी तरह से विश्वसनीय स्रोत है। हमारी शाश्वत नियति उसी पर निर्भर है।
१०. यदि आपकी जानकारी का एकमात्र स्रोत बाइबल है, तो आप किसी अन्य निष्कर्ष पर नहीं आ सकते, लेकिन इस पर जरूर की यीशु परमेश्वर हैं। वह पिता के समान है, पिता के समान प्रकृति का है, और पिता के साथ अनंत काल तक विद्यमान है।
१. इन आयतो में, यहुना (वर्ब - क्रिया) के लिए दो ग्रीक शब्दों के विपरीत वह यीशु, (यीशु- परमेश्वर का शब्द) के बारे में एक महत्वपूर्ण बिंदु बनाता है।
१. Was = EN = भूतकाल में निरंतर होने वाली क्रिया को व्यक्त करता है।
२. Was = EGENETO = काल एक समय को दर्शाता है जब कुछ अस्तित्व में आया। EN नहीं I
३. EN ''शब्द'' के लिए प्रयोग किया जाता है। EGENETO का उपयोग बाकी सभी चीजों के लिए किया जाता है। आयत ३, सभी रचित चीजें; आयात ६, याहुना बपतिस्मा देने वाला।
२. दूसरे शब्दों में, इस वर्ब शब्द (EN) का उपयोग हमें बताता है, उन चीजों के विपरीत जो एक निश्चित उतपति है, कभी भी ऐसा समय नहीं था कि जब शब्द (यीशु) मौजूद नहीं था।
१. वह शाश्वत है, वह हमेशा अस्तित्व में था, वह कोई रचना नहीं है, वह रचनहारा है।
२. शब्द परमेश्वर के साथ था = शब्द सदा परमेश्वर के साथ रहा है।
३. यहना १: १ - जब सभी चीजें शुरू हुईं, तो शब्द पहले से ही था। (NEB) उतपति १: १
३. न केवल शब्द, यीशु, हमेशा अस्तित्व में था, वह हमेशा एक प्यार भरे रिश्ते में पिता के साथ था। १ करूं १३: १२
४. विस्तार में जाने के पहले, यह बताना ज़रूरी है कि जिस तरह से यह आयात ग्रीक में लिखे गए है, यहुना सुचेत था कि परमेश्वर और शब्द को विनिमेय नहीं बनाया जा सकता है। पिता पुत्र नहीं है; पुत्र पिता नहीं है।
१. वे एक ही प्रकृति के हैं, लेकिन वे दो अलग-अलग व्यक्ति हैं।
२. यहुना १: १ - परमेश्वर ही, शब्द था। (NEB) आद में शब्द पहले से मौजूद था। वह परमेश्वर के साथ था, और वह परमेश्वर था।
३. यहुना १: १ - शुरुआत में शब्द मौजूद था। और यह शब्द परमेश्वर पिता के साथ संगति में था, और यह शब्द उसके साथ परम दिव्यता के समान था।
५. आयात २ - इस तथ्य को पुनर्स्थापित करता है कि शब्द परमेश्वर के साथ एक रिश्ते में सदा से मौजूद था।
६. आयात ३ - सभी चीजें (EGENETO) उसके द्वारा बनाई गई थीं। यह उसकी दिव्यता की एक और विशेषता है। उतपति १: १; यर्मि १०: ११,१२; इब्रा ३: ४; इब्रा १: १०-१२ (भजन १०२: २५-२७)
१. इब्रा १: १,२ यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर रचनहारा, प्रभु यीशु है।
२. कुछ लोग कहते हैं कि यीशु को सबसे पहले रचा गया, जिसने फिर सब कुछ बनाया।
३. लेकिन, ऐसा इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि यहुना १: १ यह स्पष्ट करता है कि यीशु अनंत काल तक पिता के साथ विद्यमान था - उसकी कोई शुरुआत नहीं है।
४. इब्रा १: ८ - परमेश्वर पिता को परमेश्वर पुत्र (यीशु) परमेश्वर कहता है।
७. यहुना १: १-१३ - शाश्वत शब्द यानी (यीशु) के बीच एक स्पष्ट अंतर किया जाता है और जो कि उसके द्वारा वर्ब EN और EGENETO के माध्यम से बनाया गया था।

१. यीशु को परमेश्वर का पुत्र कहना उसे पिता से कम नहीं बनाता है, और न ही यह साबित करता है की उसकी रचना की गयी थी। बाइबल के समय आयात में "सन ऑफ़"- शब्द का अर्थ संतान से होता थाI
१. पूर्वजों ने वाक्यांश का उपयोग प्रकृति की समानत होने के लिए किया था।
२. पुराना नियम इसी तरह से वाक्यांश का उपयोग करता है। १ राजा २०:३५; २ राजा २: ३,५,७,१५; नेहं १२:२८
२. धरती पर रहते हुए, जब यीशु ने कहा कि वह परमेश्वर का पुत्र है, तो वह कह रहा था कि वह परमेश्वर था।
१. यही वाक्यांश यहुदीओ ने भी उससे बात कर के, समझा होगा।
२. यहूदियों की यीशु पर प्रतिक्रिया करने के तरीके को देखें। उसने कहा कि वह परमेश्वर का पुत्र था, पर वह परमेश्वर के बराबर कहने के लिए उसे पत्थर मारना चाहते थे। यीशु ने जो कुछ कहा उनकी दुष्टि में उससे निन्दा की थी। यहुना ५:१८; १०: ३१-३३; १९: ७; लैव्य २४:१६
३. यीशु परमेश्वर का पुत्र नहीं है क्योंकि वह बेथलहम में पैदा हुआ था, इसलिए वह परमेश्वर से कम है नहीं खा जा सकता। वह पुत्र है क्योंकि वह परमेश्वर है। प्रका ३०: ४
१. पुत्र स्वर्ग और अनंत काल से आया, पृथ्वी और समय में प्रवेश किया।
यहुना ३: १६,१७; ११:२७; मीका ५: २
१. पुराने से = उसी शब्द का अनुवाद इब्रा १:१२ में अनन्त से किया गया है।
२. चिरस्थायी से = अथाह समय (अनंत काल) के दिन।
२. धरती पर आने से पहले उनकी बातें मसीह की गतिविधियों का उल्लेख करती हैं - पिता और पवित्र आत्मा के साथ उनकी शाश्वत संगति; सृष्टि में उसका हिस्सा; उनके कई पूर्ववर्ती दर्शन हैं। १ करूं १०: ४
३. यशा ९: ६- यीशु को अनन्त पिता कहा गया हैI = ज्वलंत: अनंत काल का पिता; एक मुहावरा जो समय के लिए मसीह के संबंध का वर्णन करता है, त्रिगुण के अन्य सदस्यों के लिए नहीं।
हिब्रू और अरामी में, किसी के लिए शक्ति या पिता शब्द इस्तमाल करने का मतलब है कि वह मजबूत है; ज्ञान का पिता = वह बुद्धिमान है; अनंत काल का पिता = वह एक शाश्वत प्राणी है।
४. यहना १: ३०-यहुना बपतिस्मा देने वाले का जन्म यीशु (लूका १:३६) से छह महीने पहले हुआ था। पर, यीशु, अनन्त पुत्र, उससे पहले था।
४. यीशु ने परमेश्वर के पुत्र के रूप में बोलते हुए कहा कि धरती पर आने से पहले वह पिता के साथ मौजूद था। यहुना ८: ५४-५९ (निर्ग ३:१४); यहुना ६: ३८,४६,५१,६२; ०८:4; १६:२८; १७: ५

१. यहुना १: १४-हमें बताता है कि वचन ने शरीर ग्रहण किए । त्रिगुण के दुसरे व्यक्ति ने समय में प्रवेश किया। उसने मनुष्य होंद में प्रवेश किया।
१. वर्ब का उपयोग परिवर्तन। Was = EGINATO = एक विशिष्ट समय में हुआ था।
२. उसने शरीर ग्रहण किया (न केवल एक शरीर, बल्कि एक पूर्ण मानव बना - जान, आत्मा और शरीर)। यह अवतार है।
३. पुराने नियम में, पुत्र आदमी के रूप में दिखाई दिया, लेकिन उसने मानवीय शरीर नहीं अपनाया था। हालांकि, बाद में उन्होंने किया।
२. जब पुत्र ने शरीर ग्रहण किया, तो उसने न तो परमेश्वर बनना बंद किया और न ही वह मनुष्य में परिवर्तित हुआ।
१. वह एक ही समय में पूरी तरह से परमेश्वर और पूरी तरह से मनुष्य था। यही अवतार का रहस्य है। मति १:२३ (यशा ७:१४) इमैनुएल = परमेश्वर-मनुष्य (THEANTHROPOS)।
२. जब यीशु ने मनुष्य शरीर धारण किया, तो वह परमेश्वर बनने से नहीं चूका, वह तब भी परमेश्वर था, लेकिन वह भी मनुष्य बन गया।
३. ऐसे ही वह (लूका २:५२) बढ़ सकता था, और अपरिवर्तित I AM
(यहना ८:५८; ३:१३)। प्रेरित १०: ३८-यही कारण है कि उसका अभिषेक किया जाना था।
४. परमेश्वर ने पुत्र ने एक मानव का रूप में लेकर, एक सेवक का रूप धारण करके स्वयं को विनम्र किया। उसने स्वेच्छा से स्वयं को परमेश्वर के रूप में सीमित कर लिया और एक मनुष्य के रूप में पृथ्वी पर रहने लगा। फिल २: ५-८
३. समस्याएँ तब उत्पन्न होती हैं जब लोग यीशु को मनुष्य साबित करने वाली आयात का वर्णन करते है, कि यीशु परमेश्वर नहीं हैI यहुना १४:३८
१. यहुना १४: ३ -यीशु स्पष्ट रूप से अपनी स्थिति का उल्लेख कर रहे हैं, न कि अपने स्वभाव का।
२. जब यीशु ने यह कथन दिया, की वह पहले पिता परमेश्वर की महिमा में स्तिथ था, और वह, परमेश्वर पुत्र, विनम्रता की स्थिति में तब पृथ्वी पर रहते हुए, इस संसार की गंदगी, दर्द और दुःख के साथ जीवन व्यतीत कर रहा था। ।
४. यहुना १: १७-यहुना यह स्पष्ट करता है कि वह इस आयत में यीशु के बारे में बात कर रहा है। यीशु शब्द है। यीशु त्रिमूर्ति का दूसरा व्यक्ति है।
५. यहुना १: १४,१८-यहुना परमेश्वर की पहचान करता है, शब्द पृथ्वी पर आने से पहले था और पिता परमेश्वर की उपस्तिथि में मौजूद था। पिता (परमेश्वर) और यीशु (शब्द) दोनों अलग-अलग है।
६. शब्द पलोठा (बिगोटन) की समझ न होने के कारण भी समस्याएँ होती हैं। आयत १४,१८
१. बेगोटन = MONOGENES= अनोखा; एक विशेष प्रकार का। यह बिगाट शब्द से अलग शब्द है (GENNAO) = पिता के लिए इस्तमाल करने के लिएI
२. इस शब्द का अर्थ विशिष्टता के लिए है। १: १४-हमने उनकी महिमा देखी है, केवल एक की महिमा जो पिता से आती हैं। (एन,आई,वी)
७. यीशु अनोखा क्यों है? वह एकमात्र व्यक्ति हैं जो परमेश्वर के रूप में परमेश्वर के साथ पहले से मौजूद था। वह एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिनके जन्म ने उनकी शुरुआत नहीं की। वह एकमात्र परमेश्वर-पुरुष है।
८. आयात १८-एकमात्र पलोठा पुत्र - एक अधिक शाब्दिक अनुवाद है: एकमात्र पुत्र जो परमेश्वर है।
१. संदर्भ याद रखें - यहुना अब हमें यह नहीं बता रहे हैं कि यीशु एक रचित सृष्टि है।
२. आयत १८ — किसी भी मनुष्य ने कभी परमेश्वर को नहीं देखा; एकमात्र अद्वितीय पुत्र, एकमात्र-परमेश्वर, जो परमेश्वर है, जो पिता की अंतरंग उपस्थिति में हैI
९. ट्रिनिटी के दूसरे व्यक्ति ने एक बहुत विशिष्ट उद्देश्य के लिए शरीर ग्रहण किया - इसलिए वह हमारे लिए मर सकता था, और हमारे द्वारा किये गए पापो की कीमत चूका सकता थाI इब्रा २: ९; १४,१५
१. यीशु को एक मनुष्य बनना था ताकि वह मर सके। उसे एक मनुष्य होना था क्योंकि मनुष्य पाप करता था और केवल मनुष्य ही पाप का दंड चुका सकता था। जुर्माने के भुगतान में शरीर, जान और आत्मा की पीड़ा शामिल होती है जिसे परमेश्वर सहन नहीं कर सकता है।
२. यीशु को परमेश्वर होना चाहिए था, जैसे उसके बलिदान द्वारा हमारे पापो का मूल्य चुकाया गया हैI
३. १ तिमो ३: १६-और बिना विवाद के महान ईश्वरत्व का रहस्य है: परमेश्वर मनुष्य शरीर में प्रकट हुआ।

१. परमेश्वर पिता ने पुत्र दे दिया ताकि उसके द्वारा हम परमेश्वर की संतान होI
२. परमेश्वर पुत्र स्वर्ग की महिमा को छोड़ने और इस जीवन में अपमान को सहने के लिए तैयार था। पिता परमेश्वर पुत्र को भेजने के लिए तैयार था।
३. परमेश्वर पुत्र ने मनुष्य शरीर ग्रहण किया, ताकि हम परमेश्वर की योजना का हिस्सा बन सकें।
४. परमेश्वर पुत्र ने समय में प्रवेश किया ताकि हम अनंत काल में प्रवेश कर सकें।

१. परमेश्वर पिता, पुत्र, और पवित्र आत्मा, ने हमें उस दायरे में आमंत्रित किया है और इसके लिए हमें योग्य बनाया है।
२.क्या आप देख सकते हैं कि यह जानकारी आपके दैनिक जीवन में कैसे मदद करेगी?